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सपा आरएलडी गठबंधन संयुक्त प्रत्याशी पूर्व विधायक पंडित अमरपाल शर्मा के दागी अतीत से सहमें साहिबाबाद विधानसभा के मतदाता

 साहिबाबाद विधानसभा का चुनाव दिलचस्प मोड़ पर चल रहा है यह विधानसभा एशिया की सबसे बड़ी विधानसभा में शुमार है इसमें 10 12 154 मतदाता निवास करते हैं और यहां पर कई समुदाय अपना वर्चस्व बनाने में कामयाब रहे हैं जैसे 2012 विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे जिसमें बसपा से लड़ रहे हैं अमरपाल शर्मा विजय प्रत्याशी घोषित हुए थे उन्हें 124332 मत प्राप्त हुई थी और विजय श्री उनको जनता के आशीर्वाद के रूप में मिली थी लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से चुनाव लड़ रहे सुनील शर्मा 262741 मतों से जीतकर भाजपा के खाते में 1 सीट जुड़ गई थी आप 2022 के चुनाव में यहां पर नतीजे जो 30 मार्च को आएंगे वह बहुत दिलचस्प होंगे अब आकलन करते हैं क्षेत्र की जनता किसको कितना चाहती हैं और प्रत्याशियों उनकी उम्मीदवारी किस पर टिकी है 


सबसे पहले हम बात करते हैं मौजूदा विधायक सुनील शर्मा अपने अच्छे व्यवहार से लोगों के दिल में जगह बना लेते हैं लेकिन उनका विधानसभा के निवासियों जो बाता करते है वह यह बात है  जब व्यक्ति उनके पास किसी काम के लिए जाता है तो वह इस बात पर गौर करते हैं यह मेरी विधानसभा का आदमी तो है और उसने मुझे 2017 के चुनाव में वोट दिया था या नहीं यदि वोट दिया था तो उसको उस तरह इसे इज्जत दी जाती है यदि वह व्यक्ति विधायक सुनील शर्मा को वोट नहीं करता उस व्यक्ति को इज्जत उसी हिसाब से दी जाती है जिसके लिए वोटरों की नजर में उनके नंबर 10 में से चार नंबर हैं क्योंकि यहां एक बड़ी आबादी जोकी मुस्लिम समुदाय से ताल्लुकात रखती है 145000 मतदाता है लेकिन पिछले 5 वर्षों के दौरान उन्होंने अपने विधानसभा में निवास करने वाले इन मतदाताओं को कभी भी लुभाने का प्रयास नहीं किया और न ही उनकी समस्याओं पर गौर किया है जहां पर यह लोग बड़ी तादाद में रहते हैं शहीद नगर पसोंडा और यहां की कालोनियां जिसमें यह लोग बड़ी तादाद में बसे हैं वही खोड़ा कॉलोनी का भी एक बहुत बड़ा हिस्सा मुस्लिम समुदाय से भरा पड़ा है इस सीट पर ब्राह्मण लगभग 87 हजार वाटर मौजूद है वहीं इस सीट पर 95000 दलित भी मौजूद है और एक बड़ी संख्या पूर्वांचल बिहार मूलनिवासी मतदाताओं की है जिसकी लगभग चार लाख लोग यहां पर मतदान करते हैं 


इससे यह विधानसभा एशिया की सबसे बड़ी विधानसभा में शुमार है विधायक सुनील शर्मा अपनी डबल इंजन की सरकार से काफी संतुष्ट नजर आते हैं उनका दावा है हमारी सरकार ने बहुत विकास कार्य किए हैं जैसे हिंदुओं के लिए यहां पर इंदिरापुरम क्षेत्र में कैलाश मानसरोवर भवन की स्थापना कराई गई किससे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण कर सके लेकिन इसका भी इतना असर नहीं है क्योंकि विधायक सुनील शर्मा का जो एक बॉडी लैंग्वेज है वह इसको नेगेटिव वे में ले जाता है यहां पर सबसे ज्यादा तादात भाजपा के पार्षद मौजूद है लेकिन पार्षदों की अपनी समस्याएं हैं उनका भी सही तरीके से निदान नहीं हो पाया है जिससे क्षेत्र के निवासी काफी परेशान है वह समस्या कई रूपों में दिखाई देती है विधायक सुनील शर्मा कोरोना काल में जनता से दूरी बनाकर रहे हैं जिसका खामियाजा इस चुनाव में उनको उठाना पड़ सकता है वही किसान आंदोलन भी बहुत बड़ी वजह बन रही है 13 महीने चले इस आंदोलन में लगभग 7. 50,सौ किसानों ने अपने प्राणों की आहुति दी इतने बड़े आंदोलन को चलाने की वजह बहुत बड़ी समस्या थी क्योंकि भारत सरकार ने कृषि तीन काले कानून जनता पर थोप दिए किसका किसानों में पुरजोर विरोध कर सरकार को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा 

लेकिन इन 13 महीनों के कार्यकाल के दौरान जनता किसान आम व्यक्ति के दिलों में सरकार के प्रति काफी नफरत भर गई है क्योंकि हर व्यक्ति कहीं ना कहीं किसानों से जुड़ा है आज हर वक्त व्यक्ति महंगाई की मार झेल रहा है बच्चों की फीस नहीं भर पा रहा है नौजवान नौकरियों से निकाल दिया गया है जिससे बेरोजगारों के उत्तर प्रदेश एक बहुत बड़ी फ़ौज खड़ी हो गई है जिसका सामना करने के लिए भाजपा के विधायक तैयार है और इस तैयारी में उनको अपनी कुर्सी भी गंवानी पड़ सकती है 

वही साहिबाबाद विधानसभा पर सपा आरएलडी गठबंधन प्रत्याशी पंडित अमरपाल शर्मा महागठबंधन के दौरान सुनील शर्मा से हार गए थे हारने के बाद पूर्व विधायक पंडित अमरपाल शर्मा के सितारे गर्दिश में चले गए और उनको लगभग 13 महीने जेल में रहना पड़ा मामला गज्जी भाटी भाजपा नेता हत्या के षड्यंत्र में पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया  फिर उनके ऊपर कई आरोप लगे जैसे सपा पूर्व पार्षद प्रदीप चौ. हत्या के षड्यंत्र करने के मामले पुलिस की शक की सुई तब गयी जब शार्प शूटर ने इस बात का मीडिया के सामने जिक्र किया

 लिहाजा इस विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा पढ़े लिखे लोगो सख्या है जोकि नेट कंप्यूटर चलते हैं और मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करते हैं उनका मानना है सपा प्रत्याशी अमरपाल शर्मा के दागी अतीत से सहमें है साहिबाबाद विधानसभा के लोग असमंजस में है उनको वोट करें या न करें और वे साफ-सुथरी छवि की बात करें तो छवि इसमें कांग्रेस प्रत्याशी संगीता त्यागी स्वर्गीय पति राजीव त्यागी की पत्नी है वह एक शिक्षिका है और राजनीति के अनुभव से भी दूर हैं उनके ऊपर कोई राजनीतिक धब्बा नहीं है लेकिन त्यागी समाज के 55000 वोट इस विधानसभा में निवास करते हैं यदि वे इनको कन्वेंस करने में सफल रही तो संगीता त्यागी भी सही मजबूती से चुनाव लड़ सकती हैं वही बसपा के उम्मीदवार अजीत पाल कुमार बसपा पार्टी के कोऑर्डिनेटर पद पर काम कर चुके हैं और ऊंची राजनीति में रहे हैं उन्होंने जमीनी लेवल पर कभी काम नहीं किया नहीं वह कभी किसी ज़नआंदोलन में जनता के बीच गए हैं जिससे बसपा को मजबूत प्रत्याशी के रूप में नहीं देखा जा सकता जनता अपना फैसला 10 फरवरी को वोट कर कर प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम मशीन में बंद कर देगी आने वाली 30 मार्च को इसका खुलासा होगा और कड़ी टक्कर कौन किसको देगा  और अगली खबर हम अपने पाठकों को दिलचस्प चुनावी खबरों से रूबरू कराते रहेंगे

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