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किंगजॉर्ज हॉस्पिटल का नाम बदलकर स्वतंत्रता सेनानी सतगुरु राम सिंह के नाम पर रखने का कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार सुनील शर्मा को दिया ज्ञापन

Ghaziabad : लखनऊ के किंगजॉर्ज हॉस्पिटल का नाम बदलकर स्वतंत्रता सेनानी सतगुरु राम सिंह के नाम पर रखने का कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार सुनील शर्मा को दिया ज्ञापन
गाजियाबाद राजेंद्र नगर सेक्टर 3 साहिबाबाद के कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार के कार्यालय पर शिष्टाचार भेंट कर पूर्व पार्षद एवं चेयरमैन नगर निगम गाजियाबाद  निर्मल सिंह नामधारी ने ज्ञापन देते हुए मंत्री से मांग राखीइस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि भारत के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी सतगुरु राम सिंह जी के नाम पर किंग जॉर्ज अस्पताल का नाम रखने के लिए प्रार्थना पत्र दियाउन्होंने कहा कि 1857 के विद्रोह के बाद श्री सतगुरु राम सिंह जी ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ कूका विद्रोह या नामधारी आंदोलन शुरू किया जिसमें उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू किया।
जिसमें (1) अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानूनों का बहिष्कार (2) विदेशी कपड़ों का बहिष्कार (3) डाक का बहिष्कार (4) उनकी अदालतों का बहिष्कार (5) रेलवे बसों का बहिष्कार (5) अंग्रेजों द्वारा बनाई गई सड़कों पर किसी का नामोनिशान न होना काम न करने का बहिष्कार (6) नौकरियों का बहिष्कार। गुरु जी ने रूस और नेपाल में अपने दूतावास स्थापित किए।

यह आंदोलन पूरे भारत में फैल गया और लुधियाना में इसका मुख्यालय स्थापित हुआ।

 मुख्य घटनाओं में 1872 में अमृतसर में गौ-वधशालाओं को समाप्त कर दिया गया तथा चार नामधारी सिखों को फांसी पर लटका दिया गया। इसी प्रकार की घटनाएं राठकोट तथा लुधियाना में भी हुईं तथा नामधारी सिखों को फांसी पर लटका दिया गया। मुख्य घटना 16 जनवरी 1872 को मलेरकोटला में हुई तथा नामधारी सिखों ने वहां के बूचड़खानों को नष्ट कर दिया तथा ब्रिटिश सेना तथा नामधारी सिखों के बीच युद्ध हुआ। 17 जनवरी 1872 को 67 नामधारी सिखों को ब्रिटिश सेना ने पकड़ लिया तथा अगले ही दिन 17 जनवरी 1872 को उन्हें बिना किसी मुकदमे उनको तोपों से उड़ा दिया गया तथा 18 जनवरी 1972 को सतगुरु राम सिंह जी को निर्वासित कर इलाहाबाद किले की जेल में रखा गया तथा उसके बाद उन्हें कलकत्ता में रखा गया तथा वहां से निर्वासित कर रंगून (बर्मा) भेज दिया गया तथा उन्हें उस स्थान पर रखा गया जहां मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को रखा गया था। नामधारियों ने अंग्रेजों द्वारा दी गई सेवाओं का बहिष्कार कर दिया डाक सेवा, रेल सेवा, बस सेवा तथा उनके द्वारा बनाई गई सड़कों पर वह नहीं चलाते थे उन्होंने अपनी ही डाक विभाग का स्वयं निर्माण किया बताते हैं निर्मल सिंह नामधारी ने बताया इलाहाबाद किले के लिए जो रोड जाता है उसका रोड के चौराहे पर स्मारक भी बनाया जाए बदलकर सत्गुरु राम सिंह के नाम पर किया जाए ताकि हमारी आने वालीं नस्लों को उनके बलिदान को याद रखे तथा वहीं उन्होंने बताया सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक औद्योगिक साहिबाबाद क्षेत्र में जो रोड है उसे रोड का नाम भी निर्मल सिंह नामधारी ने जब मेयर दिनेश चंद्र गर्ग थे तो प्रस्ताव देकर पास कर लिया था आप उसकी विधि विधान से स्वतंत्रता सेनानी के नाम सत्गुरु राम सिंह के नाम पर हो जाएगा

अनुरोध है कि इलाहाबाद में इलाहाबाद किले को जाने वाली सड़क का नाम सतगुरु राम सिंह जी के नाम पर रखने की माग की इस संबंध में कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा ने आश्वासन दिया इस पर जल्द सरकार विचार कर काम करेगी

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